Showing posts with label bhroon hatya. Show all posts
Showing posts with label bhroon hatya. Show all posts

Sunday, 15 July 2012

कोख को बचाने को भाग रही औरतें


कोख को बचाने को भाग रही औरतें 
------------------------------------------
ये कैसा अत्याचार है 
'कोख' पे प्रहार है 
कोख को बचाने को 
भाग रही औरतें 
दानवों का राज या 
पूतना का ठाठ  है 
कंस राज आ गया क्या ?
फूटे अपने भाग है ..
रो रही औरतें 
--------------------
उत्तर , मध्य , बिहार  से 
'जींद' हरियाणा चलीं 
दर्द से कराह रोयीं 
आज धरती है हिली 
भ्रूण हत्या 'क़त्ल' है 
'इन्साफ' मांगें औरतें ....
-------------------------------
जाग जाओ औरतें हे !
गाँव क़स्बा है बहुत 
'क्लेश' ना सहना बहन हे 
मिल हरा दो तुम दनुज 
कालिका चंडी बनीं 
फुंफकारती अब  औरतें ...
----------------------------------
कृष्ण , युधिष्ठिर अरे हे !
हम सभी हैं- ना -मरे ??
मौन रह बलि ना बनो रे !
शब्दों को अपने प्राण दो 
बेटियों को जन जननि हे !
संसार को संवार दो 
तब खिलें ये औरतें 
कोख को बचाने जो 
भाग रहीं औरतें 
---------------------
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' ५ 
१४.७.२०१२
८-८.३८ मध्याह्न 
कुल्लू यच पी