ख़ुश्बू
ख़ुश्बू ...............बेटियाँ जन्नत की हूर हैं नजरों की नूर हैं -भ्रमर ५
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Tuesday, 24 July 2012
बूढा पेड़
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बूढा पेड़ झर-झर झरता ये पेड़ (महुआ का ) कितना मन-मोहक था रस टपकता था मिठास ही मिठास गाँव भर में ‘भीड़’ जुटती इसके तले ‘बड...
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Sunday, 15 July 2012
कोख को बचाने को भाग रही औरतें
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कोख को बचाने को भाग रही औरतें ------------------------------------------ ये कैसा अत्याचार है ' कोख ' पे प्रहार है क...
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