Saturday, 28 August 2021

प्यारे हर्ष की जन्माष्टमी

 आप सब के चहेते प्यारे हर्ष ( मास्टर अनिरुद्ध) श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल कान्हा का स्वरूप धारण किए अति उत्साहित है अपने स्कूल के लिए भी उन्हे वीडियो बनाना है कन्हैया का दही मक्खन भी उन्हें खाना है यही थोड़ा मुश्किल काम है उन के लिए इसमें रुचि जो नही इन की, कितना कुछ करें ये आप सब का आशीष भी मिले 














Tuesday, 20 April 2021

संगिनी हूं संग चलूंगी

 संगिनी हूं संग चलूंगी

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जब सींचोगे

पलूं बढूंगी

खुश हूंगी मै

तभी खिलूंगी

बांटूंगी

 अधरों मुस्कान

मै तेरी पहचान बनकर

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वेदनाएं भी

 हरुंगी

जीत निश्चित 

मै करूंगी

कीर्ति पताका

मै फहरूंगी

मै तेरी पहचान बनकर

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अभिलाषाएं 

पूर्ण होंगी

राह कंटक

मै चलूंगी

पाप पापी

भी दलूंगी

संगिनी हूं

संग चलूंगी

मै तेरी पहचान बनकर

*********

ज्योति देने को

जलूंगी

शान्ति हूं मैं

सुख भी दूंगी

मै जिऊंगी

औ मरूंगी

पूर्ण तुझको

मै करूंगी

सृष्टि सी 

रचती रहूंगी

सर्वदा ही

मै तेरी पहचान बनकर

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश ,

भारत

Sunday, 18 April 2021

चंदा मामा कल ना आना

 चंदा मामा कल ना आना

मम्मी जी की थाली में

पुए भी मीठे नहीं बनाना

दूध न देना प्याली में

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बोला हूं मम्मी को अपनी

मुझे झिंगोला एक सिलाओ

ऊंची सी बनवा दो सीढ़ी

' मामा ' से चल मुझे मिलाओ

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नहीं तो चिड़ियों से मिल करके

पवन पुत्र सा मै आऊंगा

सैर करूं नभ तुझ संग मामा

हाथों तेरे ही खाऊंगा

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश,

भारत

Tuesday, 18 February 2014

शराबी

माँ बहनों संग  घर  भर  पीना
ऐश  भरे जीवन कल जीना
आज कलह झगड़ा फसाद जड़
कुर्की जब्ती दिन में भी डर
रोजगार रोटी शराब छिन
गयी-आबरू दो पैसे बिन
कौन है दोषी मय-मयखाना ?
कोई शराबी लम्पट-महिला ?
निज बिकता जाता गिरता बेंचे समाज कल
कहीं भिखारी-कहीं बीमारी जलता दिल
आओ लें संकल्प दूर हों नशे व्यसन से
भरें जोश मिल के कर लें काज-जतन से
सरस्वती  को पूजें लक्ष्मी खुद ही आयें
उन्हें उठायें गिरे पड़े जो आओ हाथ बढ़ाएं
देश समाज हमारी निजता गौरव गाथा -गाये
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२.२५ मध्याह्न
जालंधर पी बी
६.०२.२०१४


Wednesday, 14 August 2013

अनेकता में एकता --अपना भारत

अनेकता में एकता --अपना भारत


प्रिय दोस्तों और  ..मेरे नन्हे मुन्ने मित्रों आप सब को भ्रमर की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं ...

मेरा भारत महान है , हम सब की शान है अपनी जान हैं  गौरव है यह एक  शब्द नहीं है अपितु हर भारतवासी  के दिल की धड़कन  है। ये अपनी पहचान है। हम इस पवित्र भूमि में पैदा हुए हैं। हमारे लिए यह उतना  ही  महत्त्वपूर्ण है जितना कि हमारे माता-पिता हम सब के लिए । भारत केवल  एक भू-भाग का नाम नहीं है बल्कि  यह हो इस  भू-भाग में बसे लोगों, उसकी संस्कृति, उसकी सभ्यता, और उसके  रीति-रिवाजों, तथा इस के  अमूल्य और अमर इतिहास का नाम है। भारत के भौगोलिक रूप की बात अगर हम करें तो  यह एक विशाल देश है जिसके  उत्तर में पर्वत राज हिमालय  है तो दूसरी ओर दक्षिण में अथाह सागर लहरा रहा  है। पश्चिम में रेगिस्तान का मरुस्थल है तो  तो पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। ये सभी  इसकी स्थिति को बहुत ही मजबूत और  प्रभावशाली बनाए हुए है। भारत में जगह-जगह पर्वत मालाएं , हरे भरे जंगल, हरे-भरे मैदान, रमणीय और दर्शनीय  स्थल, सुन्दर समुद्र तट, देवालय हमारे चारों धाम आदि इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं। उत्तर की तरफ जहां एक ओर स्वर्ग के रूप में कश्मीर है, तो दूसरी ओर दक्षिण में सागर की सुन्दरता , यहाँ अनगिनत सरिता बहती हैं जो अपने स्वरूप द्वारा इसको अनोखा और दिव्य स्वरुप  प्रदान करती हैं।
ये भारत भूमि पर कल कल करती नदियाँ हर  भारतीय के लिए माँ के समान पूज्यनीय और वन्दनीय है।  ऊँची ऊंची पर्वत की चोटी  भारत की शान में चार चाँद लगाती हैं और विश्व में अपना स्थान रखती हैं । हमारे  भारत की सभ्यता संसार में सबसे प्राचीनतम है। इसकी पावन भूमि ने अनेकों सभ्यताओं और संस्कृतियों को जन्म दिया है। इसने केवल एक संस्कृति का पोषण नहीं किया बल्कि इसने  अनेकों संस्कृतियों को आँचल की छाया में पाल-पोस कर महान संस्कृतियों के रूप में खड़ा किया  है।हमारे  इस भारतवर्ष की भूमि ने प्रभु  राम और मन मोहन  कृष्ण को ही जन्म नहीं दिया बल्कि बड़े बड़े नेताओं जैसे महात्मा गाँधी, लाल बहादुर शास्त्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू, महान विभूतियों चन्द्र शेखर आजाद , सरदार बल्लभ भाई , भगत सिंह, पृथ्वीराज चौहान जैसे अनेकों शहीदों और महापुरूषों को जन्म दिया है, जिन्हें हम सदा सदा और शत शत नमन करते हैं ।हमारे प्रिय  भारत में लाख विभिन्नता होते हुए भी  एकता के दर्शन होते हैं। इस तरह से अपना ये भारत अनेकों गुणों से सज्जित है  हम कह सकते हैं कि भारतवर्ष का स्वरूप जितना भव्य और विशाल है, चौड़ी छाती है , जो आततायियों का काल है , दुर्गा और चंडी का रूप है तो इसका  मन उतना ही उन्नत, शहनशील , प्रेम से परिपूर्ण  और उदार है।
हमारे प्रिय  भारत में विभिन्न धर्म व जातियाँ साथ साथ रहते हैं तरह तरह की  भाषाएँ एक दूसरे  को  दिलों से बांधे हुए हैं  इन भाषाओँ में एक सुखद मिठास भरी है और सब एक दूसरे की भाषा को महत्त्व देते हैं और यहाँ अनगिनत भाषाएँ बोली जाती हैं। यहाँ की राज्यभाषा के रूप में एक तरफ हिन्दी को मान्यता प्राप्त है तो दूसरी तरफ हिन्दी, संस्कृत, मलयालम, मराठी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, तेलगु, तमिल, कन्नड़, आदि अनेकों भाषाओं का समावेश और संगम भी है । अनगिनत महापुरुषों ने इस पावन भू पर  जन्म लिया है। यह देश विविध पावन स्थलों से भरा है।

इसका जितना भी गुण गान और बखान किया जाए कम हैं , आइये हम सब मिल इसकी शान को और बढायें , लिए तिरंगा चोटी पर चढ़ते जाएँ,  ना घबराएं किसी की भृकुटी अगर इस देश पर उठे तो ऐसे गरजें की सब थर्राएँ ......अपनी संस्कृति अपनी पहचान ...वचपन से दे दें  ये सीख ..आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत कर ज्ञान दिलाएं ...और हम विश्व गुरु बन कर दिखलायें ....

हम यह गर्व से कह सकते हैं की यह एक तपस्थली है  इसका हर रज कण ,  कण-कण पावन और पूजनीय है। हम सब को  अपने भारत देश पर नाज है , गर्व है। अनेकता में एकता की  छवि लिए इस भारत भूमि को मैं नत-मस्तक हो साष्टांग  प्रणाम करता हूँ।
आइये हम प्रेम से बोलें ...
.जय हिन्द जय भारत
जय जवान जय किसान
और साथ साथ गा लें
 “सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा,
 हम बुलबुले हैं इसके, ये गुलिस्तां हमारा।।”
हमारे पिताश्री के ब्लॉग   से उद्धरित ...

आप सब को ६७ वें  स्वतंत्रता दिवस  की मंगल कामनाएं ....सब शुभ हो ...

खुशबू 


(प्रतापगढ़ भारत से )
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Tuesday, 24 July 2012

बूढा पेड़



images
बूढा पेड़
झर-झर झरता
ये पेड़ (महुआ का )
कितना मन-मोहक था
orissa_11_20090326 mahua flowers
रस टपकता था
मिठास ही मिठास
गाँव भर में
‘भीड़’ जुटती
इसके तले
images (1)
‘बड़ा’ प्यारा पेड़
‘अपने’ के अलावा
पराये का भी
प्यार पाता था
           प्यार पाता था हरियाता  था
images (2)
images (3)









फूल-फल-तेल
त्यौहार
मनाता था
थम चुका है
अब वो सिल-सिला
बचा बस शिकवा -गिला
फूल-फल ना के बराबर
मन कचोटता है ……
आखिर ऐसा क्यों होता है ??
सूखा जा रहा है
पत्ते शाखाएं हरी हैं
‘कुछ’ कुल्हाड़िया थामे
जमा लोग हंसते-हंसाते
वही – ‘अपने’- ‘पराये’
काँपता है ख़ुशी भी
ऊर्जा देगा अभी भी
‘बीज’ कुछ जड़ें पकड़ लिए हैं
‘पेड़’ बनेंगे कल
फिर ‘मुझ’ सा
‘दर्द’ समझेंगे !
आँखें बंद कर
धरती माँ को गले लगाये
झर-झर नीर बहाए
चूमने लगा !!
( सभी फोटो गूगल नेट से साभार लिया गया )
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
कुल्लू यच पी २५.६.१२
८-८.३३ पूर्वाह्न

Sunday, 15 July 2012

कोख को बचाने को भाग रही औरतें


कोख को बचाने को भाग रही औरतें 
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ये कैसा अत्याचार है 
'कोख' पे प्रहार है 
कोख को बचाने को 
भाग रही औरतें 
दानवों का राज या 
पूतना का ठाठ  है 
कंस राज आ गया क्या ?
फूटे अपने भाग है ..
रो रही औरतें 
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उत्तर , मध्य , बिहार  से 
'जींद' हरियाणा चलीं 
दर्द से कराह रोयीं 
आज धरती है हिली 
भ्रूण हत्या 'क़त्ल' है 
'इन्साफ' मांगें औरतें ....
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जाग जाओ औरतें हे !
गाँव क़स्बा है बहुत 
'क्लेश' ना सहना बहन हे 
मिल हरा दो तुम दनुज 
कालिका चंडी बनीं 
फुंफकारती अब  औरतें ...
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कृष्ण , युधिष्ठिर अरे हे !
हम सभी हैं- ना -मरे ??
मौन रह बलि ना बनो रे !
शब्दों को अपने प्राण दो 
बेटियों को जन जननि हे !
संसार को संवार दो 
तब खिलें ये औरतें 
कोख को बचाने जो 
भाग रहीं औरतें 
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'  
१४.७.२०१२
८-८.३८ मध्याह्न 
कुल्लू यच पी 

Wednesday, 23 May 2012

मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै

आज  आप  सब के आशीष से  हमें दोहरी ख़ुशी नसीब हुयी एक  तो जन्म दिन पर आप सब का आशीष और भरपूर प्यार और दूसरी तरफ आज यू पी बी एड का परीक्षा फल घोषित हुआ जिसमे मै खुश्बू १७५५ वी रैंक हासिल कर सकी जितनी आशा थी नहीं कर पायी लेकिन घर परिवार आप सब का प्यार यों ही मिलता रहेगा तो इस समाज के लिए कुछ न कुछ रचनात्मक करूंगी ..
आप सब का बहुत बहुत आभार ...बहुत आभारी हूँ मै अपने गुरुओं का , माँ पिता भाई बहन और आप सब का भी .....अब मंजिलों पर कदम बढ़ चले हैं




....हरी ओउम 
खुश्बू
पुत्री  आप सब के  "भ्रमर"  जी 






मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै महकाती जाऊं 
तितली सी उडती जाती मै 
बड़ी दूर तक  देखो तुम्हे छकाये 
मलयानिल संग घूम फिरूं मै 
उड़ उड़ आती अपना पर फैलाये 
मै खुश्बू हूँ........... मगन रहूँ मै
महकूँ मै महकाती जाऊं 
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सुन्दर-सुन्दर पुष्प हमारे 
जननी-जनक हैं न्यारे 
                                              (ये है छोटी बहना कविता -कविता ब्लॉग वाली )


                                                (ये है नटखट मेरा भाई सत्यम -बाल झरोखा सत्यम की दुनिया वाला )

भगिनी -भाई बड़े दुलारे 
कोमल आँख के तारे 
सभी ख़ुशी हैं उनको देखे
खिंचे चले ही आते 
सुन्दर जब परिवेश हमारा 
बगिया हरी भरी हो
प्रेम पुष्प जब खिलें ह्रदय तो
खुश्बू मन भर ही जाती 
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….
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आनंदित जब मन हों  अपने 
दुनिया अच्छी लगती 
गुल-गुलशन अपना खिल जाए 
बात ये बिलकुल सच्ची 
गले मिलें सौहार्द्र भरा हो 
हर मन हर को प्यार भरा हो 
सभी कृत्य अपने हों अच्छे 
बिना चाह के -जैसे बच्चे 
मगन रहूँ मै ... मै खुश्बू हूँ 
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….

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मै खुश्बू हूँ सदा सुवासित 
अन्तरंग तेरा महकाऊँ
रोम -रोम पुलकित कर तेरा 
जोश -होश सारा दे जाऊं 
अधरों पर मुस्कान खिलाती 
खुशियों की बरसात कराती 
मै खुश्बू हूँ ....
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….

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मेरे जन्म-दिवस पर आना 
खुश्बू मन भर -भर ले जाना 
अपने आशीर्वचन सुनाना 
मै जीवंत रहूँ इस उपवन 
सांस में तेरी सदा -सदा -'वन '
गाँव -शहर या गिरि कानन  सब 
दिल में तेरे बसी चलूँ मै 
उन्नति पथ पर सदा उडाऊं 
तितली सा मै रंग -बिरंगी 
सपने तेरे सच कर जाऊं 
इस घर उस घर जहां भी जाऊं 
महकूँ मै महकाती जाऊं 
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 
२४.५.२०१२ कुल्लू यच पी 
७-७.२६ पूर्वाह्न 

Thursday, 26 April 2012

हैप्पी बर्थ डे टू “सत्यम “



हैप्पी बर्थ डे टू 
सत्यम 
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मेरे प्यारे नन्हे मुन्नों 
मित्र हमारे दिल हो 
मात - पिता के बहुत दुलारे 
जग के तुम दीपक हो !
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आओ अपने नन्हे कर से 
सुन्दर प्यारा जहाँ बनायें 
सूरज चंदा तारों से हम 
झिलमिल -झिलमिल इसे सजाएं !
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प्रेम की बहती अमृत धारा 
कमल गुलाब खिले चेहरे हों 


मंद मंद मुस्कान विखेरे 
हम नूर नैन के दिलों बसे हों !
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फूल खिले हों चिड़ियाँ गायें 

नाच मोर हर दिन सावन हो 

ख़ुशी रहे "तुलसी" घर आंगन 
ज्ञान का दीपक ज्योति जगी हो 
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होली दीवाली से हर दिन 
झूमें हम - मन - मिला रहे 
गुडिया गुड्डे और घरौंदे 

अपनी दुनिया सजी रहे !
  
देश के वीर सपूत बनें हम 
भारत - माँ - के लाल बनें 
शावक से जब सिंह बनें हम 
गरजें अरि के काल बनें !

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सभी बड़े- छोटे- सब मिल के 
ह्रदय लगा  - दे - दें आशीष 
सदा सहेजे --  मै रखूँगा 
नमन करूँ - तुम गुरु हो- ईश !
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कल है मेरा जन्म-दिवस- 'प्रिय'
केक काटने आ जाना 

स्नेह लुटा बबलू पप्पू बन 
लड्डू -टाफी - खा जाना 

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गुब्बारे- संग -फूल खिलेंगे
खुश्बू  होगी- कविता होगी 
भ्रमर रहेंगे मधुर गीत में 
काव्य गोष्ठी अद्भुत होगी 
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आपका स्नेहाकांक्षी 'सत्यम"
द्वारा भ्रमर-५- २६.४.२०१२ 
प्रतापगढ़ उ.प्र. 

Tuesday, 24 April 2012

मै खुश्बू हूँ


मै खुश्बू हूँ
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पुष्प हमारे जीवन दाता
वही हमारे भाग्य विधाता
अंक भरे जीवन भर पालें
मधु -पराग से ज्यादा मानें

मै  उडती तितली सी ही हूँ
बड़ी दूर तक जाऊं
कलियाँ तितली भौंरों के संग
खेल-खेल इतराऊँ
मुझसे आकर्षित हो - हो के
लोग खिंचे ही आयें
मात -पिता को मेरे देखे
और ख़ुशी हो जाएं
मांग सकें ना उनसे मुझको
मै तो उनकी जान
सदा रहूंगी जग में प्यारी
बन उनकी पहचान



खिला रहे गुल-गुलशन अपना
दूर भले ही जाऊं
जब जी चाहे -प्यार उमड़ता
भागी घर आ जाऊं
रंजो गम दुनिया के दिल के
"हर"  -खुशियाँ -दे जाऊं
ख़ुशी -ख़ुशी मुस्काते चेहरे
देख -देख अति खुश हो जाऊं
जो निर्मल -मन-प्रेमी मिलता
दिल में मै बस जाऊं
मै खुश्बू हूँ !!
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सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
मेरे ब्लॉग "खुश्बू" से उद्धृत
७.३५-७.४८ पूर्वाह्न
                            कुल्लू यच पी २४.४.१२